1- धर्मनिरपेक्षता का हक़: यह अधिकार सभी नागरिकों को अपने धर्म और धार्मिक आदर्शों के प्रति स्वतंत्रता और समानता का हक़ प्रदान करता है। किसी व्यक्ति को उसके धर्म, धार्मिक अपनी जीवनशैली, पूजा, उपासना और संगठन को लेकर किसी भी तरह के अनुचित हस्तक्षेप से बचाने का हक़ होता है।
2- धार्मिक स्वतंत्रता: सभी नागरिकों को अपने धर्म को प्रचार, प्रवर्तन, और अनुयायों को अनुसरण करने का स्वतंत्रता का हक़ होता है। इसके अंतर्गत उन्हें संबंधित धर्मिक जगहों तक पहुंच, संगठन बनाने, पूजा या अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में सहयोग करने का हक़ होता है।
3- सभी धर्मों के समान सम्मान: इस अनुच्छेद के अंतर्गत, किसी भी व्यक्ति को धर्म के आधार पर उसके सामाजिक या राजनीतिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता है। सभी धर्मों का समान सम्मान और आदर्शों का विश्वास रखने का हक़ होता है।
अनुच्छेद 15 भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता के महत्वपूर्ण मूल अधिकारों को संरक्षित करता है, जिसके तहत नागरिकों को धर्म से जुड़े मामलों में स्वतंत्रता, समानता, और संरक्षण का हक़ प्राप्त होता है।
अनुच्छेद -16 :
लोक निर्वाचन ( Public employ - ment ) [ सरकारी नौकरी की समानता ]
इसमें पिछड़े वर्गों के लिए कुछ समय आरक्षण की चर्चा है |
अनुच्छेद -17 :
1- अस्पृश्यता -छुआ - छूत का अंत :
2- निजता की संरक्षा: यह अधिकार सभी नागरिकों को उनकी निजी जीवन की संरक्षा और अवरोध से मुक्त होने का हक़ प्रदान करता है। किसी भी व्यक्ति को उसकी निजी जीवनशैली, गुप्तता, संपत्ति, और बातचीत को अनुचित रूप से उजागर किया जाना चाहिए।
3- गैर-हस्तक्षेप: नागरिकों को उनके निजी जीवन की स्वतंत्रता के साथ संबंधित अधिकारों का हक़ होता है, जिसमें अनुचित तरीके से उनकी संपत्ति, संदेश, और बातचीत में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए।
4- निजी जीवन की अवरोध: नागरिकों को अनुचित तरीके से निजी जीवन की अवरोध से बचाने का हक़ होता है। किसी भी व्यक्ति को उसके निजी जीवन में घुसपैठ, बेनक़ाब होना, या उसकी आत्मा की अवमानना किए जाने से बचाया जाना चाहिए।
अनुच्छेद 17 भारतीय संविधान में निजता के महत्वपूर्ण मूल अधिकारों को संरक्षित करता है, जिसके तहत नागरिकों को उनके निजी जीवन की स्वतंत्रता, गुप्तता, और संपत्ति का हक़ प्राप्त होता है।
अनुच्छेद 18: संघटना का हक़ :
1- उपाधियों का अंत किन्तु शिक्षा , सुरक्षा तथा भारत रत्न , पादप विभूषण इत्यादि रख सकते है | विदेशी उपाधि रखने पूर्व राष्ट्रपति से अनुमति लेनी पड़ती है |
2- संघटना की स्वतंत्रता: यह अनुच्छेद सभी नागरिकों को स्वतंत्रता का हक़ प्रदान करता है ताकि वे किसी भी संघटना या संगठन में शामिल हो सकें और उसे स्थापित कर सकें। यह संघटना धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक या किसी अन्य क्षेत्र में हो सकती है।
3- संघटना की संरक्षा: नागरिकों को संघटनाओं और संगठनों की संरक्षा का हक़ होता है। इस अनुच्छेद के तहत, किसी भी संघटना को अनुचित रूप से विघटित करने से, रोकने से या उसकी गतिविधियों में हस्तक्षेप करने से बचाया जाना चाहिए।
44 अधिकारों की संरक्षा: संघटनाओं और संगठनों को अपने संघटनात्मक अधिकारों की संरक्षा का हक़ होता है। यह संघटना अपने लक्ष्यों, संगठनात्मक नियमों, और संगठनात्मक संविधान के अनुसार अपनी गतिविधियों का पालन कर सकती है।
अनुच्छेद 18 संविधान में नागरिकों को संघटना करने और संघटनाओं में शामिल होने का महत्वपूर्ण मूल अधिकार प्रदान करता है।
स्वतंत्रता का अधिकार [अनुच्छेद 19 - 22 ]
Right ऑफ़ Freedom [Article 19 -22 ]
अनुच्छेद 19 -
Right ऑफ़ Freedom [Article 19 -22 ]
अनुच्छेद 19 - ( १) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, झंडा लहराने तथा पुतला जलाने ,
RTI तथा प्रेस की स्वतंत्रता |
(२ ) बिना हथियार सभा करने की स्वतंत्रता |
(३ ) संगठन बनाने की स्वतंत्रता |
(४ ) बिना रोक टोक चारो तरफ घूमने की स्वतंत्रता |
(५ ) भारत में किसी भी राज्य या डिस्ट्रिक में बसने की स्वतंत्रता |
(६) संपत्ति का अधिकार ( RIGHT ऑफ़ PROPERTY ) अब यह मूल अधिकार नहीं रहा | बल्कि
क़ानूनी अधिकार ( Legal Rights ) हो गया है |
सभी नागरिकों को मानवीय और स्वतंत्रता के अधिकारों की सुरक्षा प्राप्त होती है। इसमें अधिकार शामिल हैं जैसे कि जीवन, शरीरिक और मानसिक अभिवृद्धि, न्याय, उच्चतम संरक्षा, भाषा, संगठन स्वतंत्रता, धर्म, संघटना और स्थानीय प्रशासनिक स्वतंत्रता।
* मूल संबिधान के मूल अधिकारों की संख्या 7 थी किन्तु संपत्ति के अधिकार को 44 वे संबिधान संसोधन द्वारा 1978 में
मौलिक अधिकार से हटा दिया गया | अब इसे अनुच्छेद 300( क ) के तहद क़ानूनी अधिकार ( Legal Rights ) में रखा गया है |
(७) व्यवसाय करने की स्वतंत्रता ( Freedom to do Business ) |
अनुच्छेद 20 - अनुच्छेद २० में तीन प्रकार की स्वतंत्रता दी गयी है |
(१ ) एक गलती की एक सजा |
(२ ) इसमें सजा उस समय की गयी कानून के आधार पर दी जायेगी नाकि पहले या बाद के कानून के आधार पर |
(३) सजा के बाद भी कैदी को संरक्षण दिया जाता है |
Note - अनुच्छेद 20 के आधार पर जब तक किसी व्यक्ति को न्यायलय दोसी करार नहीं कर देती तब तक उस मुजरिम को
अपराधी नहीं माना जाता है |
धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार, जिसमें धर्म से संबंधित उपासना, प्रचार, संगठन और विचार की स्वतंत्रता शामिल है। यह अधिकार सभी नागरिकों को प्राप्त होता है।
अनुच्छेद 21 - इस अनुच्छेद में प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता है | इसी के कारण अधिक धुँवा वाले वाहन या बिना हेलमेट वाहन
चलाने वाले व्यक्ति को पुलिस चालान कटती है | अनुच्छेद 21 में ही निजता का अधिकार ( Right to Privancy ) पर जोड़ दिया गया है |
अब हमारी गोपनीय जानकारी को कोई उजागर नहीं कर सकता |
Note - अनुच्छेद 20 तथा अनुच्छेद 21 को आपातकाल के दौरान नहीं रोका जा सकता अतः इसे सबसे शक्तिशाली मूल अधिकार कहते है |
जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार, जिसमें नागरिकों को उनके जीवन की सुरक्षा, व्यक्तिगत गोपनीयता, और व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन के मामलों में आदान-प्रदान की स्वतंत्रता प्रदान की जाती है।
अनुच्छेद 22 - इस अनुच्छेद में तीन प्रकार की स्वतंत्रता दी गयी है | जो गिरफ़्तारी से संरक्षण ( रक्षा ) करती है |
(१) व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले वारंट ( कारण ) बताना पड़ता है |
(२) मुजरिम को २४ घंटे के अंदर न्यायलय में सह - शरीर पेश किया जाता है | इस २४ घंटे में
यातायात तथा अवकाश का समय नहीं गिना जाता है |
(३) गिरफ्तार मुजरिम को अपने पसंद का वकील रखने का अधिकार है |
निवारक निरोध अधिनियम ( Preventive Detention Act )
* इसकी चर्चा अनुच्छेद २२ के iv में है | इसका उद्देश्य किसी को सजा देना नहीं है बल्कि किसी को अपराध
करने से रोकना है | इस कानून के तहद पुलिस शक के आधार पर किसी भी व्यक्ति को बिना कारण बताये
अधिकतम तीन महीने तक गिरफ्तार या नजरबन्द रख सकती है |
* नजरबन्द - किसी व्यक्ति को अगर समाज से मिलाने नहीं दिया जाता है तो उसे नजरबन्द कहते है |
नजरबन्द होटल, आवास या जेल कही भी हो सकता है |
* भारत के प्रमुख निवारक निरोध अधिनियम ( Major Preventive Detention Act in India ) -
(i) निवारक निरोध अधिनियम 1950 - यह भारत का पहला निवारक निरोध अधिनियम है | 31 Dec 1972 में इसे
समाप्त कर दिया है |
(ii) आतंरिक सुरक्षा अधिनियम - इसे 1971 में लाया गया किन्तु इसका सर्वाधिक दुरुपयोग हुआ जिस कारण 1978 में इसको भी समाप्त कर दिया गया |
(iii) राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ( रासुका ) इसे १९८० में लाया गया | यह अभी तक लागू है | यह वर्तमान में सबसे खतरनाक अधिनियम है | इसके तहद पुलिस इनकाउंटर कर देती है |
(iv) आतंकवादी एवं विध्वंसक गतिविधियाँ - इसे १९८५ में आतंकवाद के विरुद्ध लाया गया था | इसका दुरुपयोग होने के कारण २३ मई १९९५ में रद्द
कर दिया गया |
(v) आतंकवादी निवारक अधिनियम - यह भी आतंकवादी पर लगाया जाता है| इसे २००१ में प्रारम्भ तहत २००४ में समाप्त कर दिया गया |
3 . शोशल के विरुद्ध के विरुद्ध [अनुच्छेद 23 -24 ] Right Against Exploitation (23 - 24 )
अनुच्छेद 23 - बलात श्रम (जबजस्ती श्रम ) तथा बेगारी ( बिना वेतन ) ( forced labour ) पर रोक लगाया गया | किन्तु राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बलात श्रम या बेगारी ( Forced labour ) कराया जा सकता है |
अनुच्छेद 24 - 24 वर्ष से काम उम्र के बच्चो को खतरनाक कार्य (डेंजरस वर्क ) में नहीं लगाया जा सकता |
4 . धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार [अनुच्छेद 25 -28 ] Right to Freedom of Religion (article - 25 -28 )
अनुच्छेद 25 - अन्तः करण की चर्चा अर्थात व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता की चर्चा है | इसके तहद सिखों कृपाण ( तलवार ) मुसलमानो को दाढ़ी, हिन्दुओ को टिकी रखने की स्वतंत्रता है |
अनुच्छेद 26 - इसमें सामूहिक धार्मिक स्वतंत्रता की चर्चा है | इसके तहद यज्ञ,हवन, तथा सड़क पर
नवाज पड़ने की अनुमति है |
अनुच्छेद 27 - धार्मिक कार्य के लिए रखा गया धन पर कोई टेक्स नहीं लगेगा |
अनुच्छेद 28 - सरकारी धन धन से चल रहे संस्थान में धार्मिक शिक्षा ( Religious Education ) नहीं दी जाएगी |
Remark - संस्कृत एक भाषा है न की हिन्दू धर्म की धार्मिक शिक्षा है इसी प्रकार उर्दू तथा अरबी एक भाषा है न की इस्लाम धर्म की शिक्षा | अतः सरकारी मदरसा अनुच्छेद 28 का उलंघन नहीं करता है |
5. संस्कृत एवं शिक्षा सम्बन्धी अधिकार [ अनुच्छेद 29 -30 ] अल्पसंख्यक
Cultural and Aducation Rights ( Article - 29 -30 )
अनुच्छेद 29 - [ अल्पसंख्यक के हितो का संरक्षण ] -
इसमें अल्पसंख्यकों की रक्षा है और कहा है कि किसी भी अल्पसख्यक इसकी भाषा संस्कृति के आधार पर किसी संस्था में प्रवेश से नहीं रोक सकते |
अनुच्छेद 30 - [ अल्पसंख्यकों का शिक्षा संरक्षण ]
अल्फसंख्यक यदि बहुसंख्यको के बिच में शिक्षा लेने में संकोच कर रहा है तो अल्पसंख्यक अपने की संस्था खोल सकते है
सरकार उसे भी धन देगी |
अनुच्छेद 31 - इसमें पैतृक संपत्ति की चर्चा की गयी है | जो मूल अधिकार था किन्तु 44 वॉँ संबिधान संसोधन 1978 द्वारा
इसे क़ानूनी अधिकार बना दिया गया और अनुच्छेद 300 ( क ) में जोड़ दिया गया |
Remark - अनुच्छेद -19 (vi ) में अर्जित संपत्ति की चर्चा है | जबकि 31 में पैतृक संपत्ति की चर्चा है |
(ii) - मूल अधिकार को हमसे सरकार या जनता कोई नहीं छीन सकता जबकि क़ानूनी अधिकार को जनता नहीं छीन सकती किन्तु सरकार छीन सकती है | इसके लिए सर्कार ने भूमि अधिग्रहण विधेयक लाया |
6 . संवैधानिक उपचारो का अधिकार [अनुच्छेद 32 ] Right to constitutional remedies (Article -32 )
अनुच्छेद 32 - संवैधानिक उपचार का अधिकार अनुच्छेद ३२ को मूल अधिकार को मूल अधिकार बनाने वाला मूल अधिकार कहा जाता है | क्योकि इसके द्वारा व्यक्ति हनन के मामले पर सीधे सुप्रीमकोर्ट जा सकता है | सुप्रीमकोर्ट पाँच प्रकार के रिट /याचिका या समादेश जारी कराती है |
* बंदी प्रत्यक्षीकरण ( Habeas Corpus ) - यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सबसे बड़ा रिट है | यह बंदी बनाने वाली अधिकारी को आदेश देती है | की उसे 24 घंटे के भीतर सह शरीर न्यायलय में प्रस्तुत करे |
* परमादेश ( Mandameous ) - इसका अर्थ होता है -'हम आदेश देते है | जब कोई सरकारी कर्मचारी अच्छे से कार्य नहीं करता तो यह उसपर जारी किया जाता है |
* अधिकार पृच्छा ( Quo Warranto ) - जब कोई व्यक्ति ऐसे कार्य को करने लगे जिसके लिए वह अधिकृत नहीं है तो उसे रोकने के लिए अधिकार पृच्छा आता है |
* अनुच्छेद 352 ( राष्ट्रीय आपात ) के दैरान केवल 20 और 21 ही ऐसा अनुच्छेद है जिसे वंचित नहीं किया जा सकता |
* प्रतिरोध ( Certiorari ) - यह ऊपरी न्यायलय अपने से निचली न्यायलय पर तब लाती है | जब निचली न्यायलय अपने अधिकारों का उलंघन करके फैसला सुना चुकी होती है |
* उत्प्रेषण ( Certiorari ) - यह भी ऊपरी न्यायलय अपने से निचली न्यायलय पर तब लाती है | जब निचली न्यायलय अपने अधिकारों का उलंघन करके फैसला सुना चुकी होती है |
Note - बाबासाहब आंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को 'संबिधान की आत्मा ' कहा था |
नोट - किस भाग को संबिधान की आत्मा कहते है | - प्रस्तावना
Note - पॉँच प्रकार के रिट को अनुच्छेद 226 के तहद हाईकोर्ट भी जारी कर सकता है |
अनुच्छेद 33 - राष्ट्रीय सुरक्षा हित में सांसद , सेना ,मिडिया तथा गुप्तचर के मूल अधिकार को सिमित करसकती है |
अनुच्छेद 34 - भारत के किसी क्षेत्र में सेना का कानून लागु किया जा सकता है सेना को न्यायलय को
court Marshal कहते है | सबसे कठोर Marshal law -AFSPA है |
[Axnel Forces Special Power Act ]
अनुच्छेद 35 - भाग -3 में दिए गए मूल अधिकार के लागू होने के विधि की चर्चा |
* मूल अधिकार को 7 श्रेणियों में बाटा गया था | किन्तु वर्तमान में 6 श्रेणियाँ है |
श्रेणी ( Series ) अनुच्छेद ( Articles )
१. समानता का अधिकार - [14 - 18 ]
Right to equality
२. स्वतंत्रतता का अधिकार - [ 19 - 22 ]
Right to freedom
३. षोशण के विरुद्ध अधिकार - [ 27 - 24 ]
Right against exploitation
४. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार - [ 25 - 28 ]
Right तो freedom of religion
५. शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार - [ 29 - 30 ]
Cultural and educationnal rights
६. संपत्ति का अधिकार - [ 31 x ]
property Right
७. संवैधानिक उपचार का अधिकार - [ 32 ]
Right to constitutional remedies
नोट - अनुच्छेद 14 ,[ 20 ,21 ,2 A ],[23 ,24 ],[ 25 - 28 ]- भारतीय तथा विदेशियों के दोनों के लिए |
* अनुच्छेद १५,१६,१९,२९,एवं ३० केवल भारतीयों को मिलता है |
* हड़ताल करना तथा चक्का जाम करना मूल अधिकार नहीं है क्योकि इसमें अन्य व्यक्तियों के
मूल अधिकार का हनन होता है |
* स्थाई आवास तथा अनिवार्य रोजगार मूल अधिकार नहीं है |
* वोट डालने का अधिकार राजनितिक अधिकार है मूल अधिकार नहीं है |
* मूल अधिकार को कुछ समय के लिए राष्ट्रपति निलंबित करते है |
* मूल अधिकार को स्थाई रूप से प्रतिबंधित संसद कराती है |
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